Kumar Vishwas Ki Shayari in Hindi 2023 Latest Collection

kumar vishwas ki shayari

Kumar Vishwas ki shayari – yeh shabd ek aisi mehfil ko yaad dilate hain jahan shabdon ka sajawat ek anokha jadoo bana deta hai. Unki shayari mein woh rang hai, woh andaaz hai jo hamare dilon ko choo leta hai. Aaj, hum lekar aaye hain aapke liye ek khaas safar, jahan aap Kumar Vishwas ji ke shayari ke rangin duniya mein kho jayenge. 

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Kumar Vishwas ki shayari ki duniya ek aisi khoj hai, jahan har lafz, har sher, aur har gazal ek kahani sunata hai. Unki shayari mein mohabbat, zindagi, aur insaniyat ki gehraiyon tak pahunchne ka jadoo hai. Har kavita, har bait, Kumar Vishwas ki shayari ki ek nayi dastaan hai, jo aapko apne andar ke ehsaason se jodti hai.

Kumar Vishwas, jo khud ek ustaad shayar hain, unki shayari mein ek alag hi jaadu hai. Unka jazba, unki aawaz, aur unka andaaz shayari ko ek nayi bulandiyon tak pohochata hai. Shayar se lekar samanya log tak, sabhi unki shayari se prabhavit hote hain. Kumar Vishwas ki shayari ke har lafz mein ek zindagi ki kahani chhupi hoti hai.

Kumar Vishwas ki shayari ki ek khaas baat yeh hai ki woh aksar aam aadmi ke dard aur khushi ko bayaan karte hain. Unki shayari mein aam zindagi ke chhote lamhe, sapne, aur rishte chhupi hoti hain. Jab aap Kumar Vishwas ki shayari ko padhte hain, toh aapko apni zindagi mein wohi chhote-chhote pal yaad aate hain jo aapne bhulaye nahi hain.

Kumar Vishwas ki shayari ne naye shayar aur shayaraon ko bhi prerit kiya hai. Unka impact shayari ke prati premiyo aur shayari ke deewano ke beech mein kaafi gehra hai. Unki kavitaon aur gazalon mein chhupi sannata ko sun kar, aapko woh alag duniya mein le jati hai, jahan sab kuch shayari ban jata hai.

Kumar Vishwas ki shayari ka yeh safar kabhi khatam nahi hota. Unke shabdon mein chhupi rahasyaon ko samjhne ka safar hamesha chalta rehta hai. To chaliye, is khoobsurat safar par nikalte hain aur dekhte hain kaise Kumar Vishwas ki shayari ne hamare dilon ko chhua aur unka panapta jadoo kiya.

Kumar Vishwas Ki Shayari

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Kumar Vishwas ki shayari, ek aisi kala hai jahan lafz mere dil se judkar aapke dil tak pohochte hain. Unki shayari mein woh anokha jadoo hai jo aapko har baar prabhavit karta hai. Is blog mein, hum aapko unke shabdon ki duniya lekar ja rahe hain, jahan aap unki kala ka asli rang dekhenge.

kumar vishwas ki shayari

Teri aankhen batain, tujhse kya chhupi hai,
Mere dil ki baat, teri zubaan se keh do. 

Kismat ka likha, koi bhi na samjhe,
Zindagi ka safar, manzil tak jaana hai.

Khoobsurat andaaz se, tera naam le liya,
Tujhe chhu ke, zindagi ko apna bana liya.

Mohabbat mein, khushboo se bhi gehra rishta hai,
Tere pyaar mein, mere dil ka har hissa hai.

Duniya ki bheed mein, tu meri duniya hai,
Teri yaadon se, guzarti hai har subah-shaam.

kumar vishwas ki shayari with images

Kuch lafz hai jo, dil se nikalte hain,
Mere kalam se, teri yaadon tak pahunchte hain. 

Khushboo teri yaadon ki, paas aaye toh,
Zindagi mein phir se, rang bharne lage.

Tere pyaar mein, dard bhi hai, khushi bhi hai,
Zindagi ka safar, teri yaadon mein hai basi.

Meri har kavita, teri yaadon ki tasveer hai,
Teri baaton se, meri duniya hai mehfil.

Teri muskurahat, meri khushi ka raaz hai,
Tere bina, zindagi mein kuch bhi aaj nahi hai.

kavi kumar vishwas ki shayari

Tujhse judi har pal, ek yaad ban gayi hai,
Teri bina, duniya suni si lagti hai. 

Teri baatein, teri yaadon ki baarish hai,
Mere dil pe, tera naam likha hai har kadam.

Zindagi ke safar mein, tere saath chalna hai,
Tere saath, har kathin raasta asaan ho jaata hai.

Tere dil se judi, meri duniya hai yeh,
Tere bina, kuch bhi adhoora lagta hai.

Tere pyaar mein, har din naya sapna hai,
Teri aankhon mein, meri zindagi ka jahan hai.

kumar vishwas ki all shayari

Teri yaadon ka jadoo, dil se nahi jaata,
Tere saath, har din naya safar banata hai. 

Tere pyaar mein, mohabbat ki raahon pe,
Chalte-chalte, hum khud ko khota jaata hai.

Tere ishq mein, duniya ki har khushi hai,
Tere bina, sab kuch adhoora hai mere paas.

Tere pyaar mein, zindagi ke rang hai,
Teri yaadon se, dil ko sukoon milta hai.

Kumar Vishwas Ki Shayari in Hindi

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Kumar Vishwas ki shayari Hindi mein padhne se uska alag hi anand aata hai. Unke lafz, unki bhasha, sab kuch ek saath, woh hai asli Kumar Vishwas ki shayari. Is blog mein, aap Hindi mein unki shayari ke saath jud kar unke shabdon ka saundarya mehsus kar sakenge.

Kumar Vishwas Ki Shayari in Hindi

प्रथम पद पर वतन न हो, तो हम चुप रह नहीं सकते
किसी शव पर कफ़न न हो, तो हम चुप रह नहीं सकते
भले सत्ता को कोई भी सलामी दे न दे लेकिन
शहीदों को नमन न हो तो हम चुप रह नहीं सकते 

इन उम्र से लम्बी सड़को को, मंज़िल पे पहुंचते देखा नहीं,
बस दोड़ती फिरती रहती हैं, हम ने तो ठहरते देखा नहीं..!!

वो सब रंग बेरंग हैं जो ढूंढते व्यापार होली में,
विजेता हैं जिन्हें स्वीकार हर हार होली में,
मैं मंदिर से निकल आऊँ तुम मस्जिद से निकल आना,
तो मिलकर हम लगाएंगे गुलाल-ए-प्यार होली में

गिरेबान चेक करना क्या है सीना और मुश्किल है,
हर एक पल मुस्कुराकर अश्क पीना और मुश्किल है,
हमारी बदनसीबी ने हमें बस इतना सिखाया है,
किसी के इश्क़ में मरने से जीना और मुश्किल है.

हर ओर शिवम-सत्यम-सुन्दर ,
हर दिशा-दिशा मे हर हर है
जड़-चेतन मे अभिव्यक्त सतत ,
कंकर-कंकर मे शंकर है…”

kumar vishwas ki latest shayari

एक दो दिन मे वो इकरार कहाँ आएगा ,
हर सुबह एक ही अखबार कहाँ आएगा ,
आज जो बांधा है इन में तो बहल जायेंगे ,
रोज इन बाहों का त्योहार कहाँ आएगा…!! 

मिले हर जख्म को मुस्कान को सीना नहीं आया
अमरता चाहते थे पर ज़हर पीना नहीं आया
तुम्हारी और मेरी दस्ता में फर्क इतना है
मुझे मरना नहीं आया तुम्हे जीना नहीं आया

जो किए ही नहीं कभी मैंने ,
वो भी वादे निभा रहा हूँ मैं.
मुझसे फिर बात कर रही है वो,
फिर से बातों मे आ रहा हूँ मैं !!

मेरा अपना तजुर्बा है तुम्हे बतला रहा हूँ मैं
कोई लब छू गया था तब के अब तक गा रहा हु मैं
बिछुड़ के तुम से अब कैसे जिया जाए बिना तड़पे
जो में खुद हे नहीं समझा वही समझा रहा हु मैं..

अपनों के अवरोध मिले, हर वक्त रवानी वही रही
साँसो में तुफानों की रफ़्तार पुरानी वही रही
लाख सिखाया दुनिया ने, हमको भी कारोबार मगर
धोखे खाते रहे और मन की नादानी वही रही…!!

kumar vishwas ki shayari 2018

कोई मंजिल नहीं जंचती, सफर अच्छा नहीं लगता
अगर घर लौट भी आऊ तो घर अच्छा नहीं लगता
करूं कुछ भी मैं अब दुनिया को सब अच्छा ही लगता है
मुझे कुछ भी तुम्हारे बिन मगर अच्छा नहीं लगता। 

मैं अपने गीतों और ग़ज़लों से उसे पेगाम करता हु
उसकी दी हुई दौलत उसी के नाम करता हूँ
हवा का काम है चलना, दिए का काम है जलना
वो अपना काम करती है, में अपना काम करता हूँ

नज़र में शोखिया लब पर मुहब्बत का तराना है
मेरी उम्मीद की जद़ में अभी सारा जमाना है
कई जीते है दिल के देश पर मालूम है मुझकों
सिकन्दर हूं मुझे इक रोज खाली हाथ जाना है।

हिम्मत ऐ दुआ बढ़ जाती है
हम चिरागों की इन हवाओ से
कोई तो जाके बता दे उसको
दर्द बढ़ता है अब दुआओं से

मै तेरा ख्वाब जी लून पर लाचारी है
मेरा गुरूर मेरी ख्वाहिसों पे भरी है
सुबह के सुर्ख उजालों से तेरी मांग से
मेरे सामने तो ये श्याह रात सारी है

kumar vishwas ki shayari hindi mai

सब अपने दिल के राजा है, सबकी कोई रानी है
भले प्रकाशित हो न हो पर सबकी कोई कहानी है
बहुत सरल है किसने कितना दर्द सहा
जिसकी जितनी आँख हँसे है, उतनी पीर पुराणी है 

सदा तो धूप के हाथों में ही परचम नहीं होता
खुशी के घर में भी बोलों कभी क्या गम नहीं होता
फ़क़त इक आदमी के वास्तें जग छोड़ने वालो
फ़क़त उस आदमी से ये ज़माना कम नहीं होता।

ये दिल बर्बाद करके सो में क्यों आबाद रहते हो
कोई कल कह रहा था तुम अल्लाहाबाद रहते हो
ये कैसी शोहरतें मुझको अता कर दी मेरे मौला
मैं सभ कुछ भूल जाता हूँ मगर तुम याद रहते हो !!

स्वंय से दूर हो तुम भी स्वंय से दूर है हम भी
बहुत मशहूर हो तुम भी बहुत मशहूर है हम भी
बड़े मगरूर हो तुम भी बड़े मगरूर है हम भी
अतः मजबूर हो तुम भी अतः मजबूर है हम भी

हमने दुःख के महासिंधु से सुख का मोती बीना है
और उदासी के पंजों से हँसने का सुख छीना है
मान और सम्मान हमें ये याद दिलाते है पल पल
भीतर भीतर मरना है पर बाहर बाहर जीना है।

Kumar Vishwas Ki New Shayari

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Kumar Vishwas ki new shayari, unke shayari ke premiyo ke liye ek anmol uphaar hai. Unka har naya sher, har kavita, har gazal ek nayi duniya ki taraf le jaata hai. Aap yahan pe unke naye aur taaza lafzon ka aanand le sakte hain.

Kumar Vishwas Ki New Shayari

जमाना अपनी समझे पर, मुझे अपनी खबर यह है
तुझे मेरी जरुरत है, मुझे तेरी जरुरत है 

जब साड़ी पहने एक लड़की का, एक फोटो लाया जाता है ,
जब भाभी हमें मनाती हैं , फोटो दिखलाया जाता है ,

मैं तेरा खोया या पाया हो नहीं सकता
तेरी शर्तो पे गायब या नुमाया हो नहीं सकता
भले साजिश से गहरे दफ़न मुझ को कर भी दो पर मैं
स्रजन का बीज हुँ मिटटी में जाया हो नहीं सकता

कोई पत्थर की मूरत है, किसी पत्थर में मूरत है
लो हमने देख ली दुनिया, जो इतनी खुबसूरत है
जमाना अपनी समझे पर, मुझे अपनी खबर यह है
तुझे मेरी जरुरत है, मुझे तेरी जरुरत है

एक पहाडे सा मेरी उँगलियों पे ठहरा है
तेरी चुप्पी का सबब क्या है? इसे हल कर दे
ये फ़क़त लफ्ज़ हैं तो रोक दे रस्ता इन का
और अगर सच है तो फिर बात मुकम्मल कर दे

kumar vishwas shayari

दीदी कहती हैं उस पगली लड़की की कुछ औकात नहीं ,
उसके दिल में भैया , तेरे जैसे प्यारे जज्बात नहीं , 

तुम्हारा ख़्वाब जैसे ग़म को अपनाने से डरता है
हमारी आखँ का आँसूं , ख़ुशी पाने से डरता है
अज़ब है लज़्ज़ते ग़म भी, जो मेरा दिल अभी कल तक़
तेरे जाने से डरता था वो अब आने से डरता है

वो पगली लड़की नौ दिन मेरे लिए भूखी रहती है ,
छुप -छुप सारे व्रत करती है , पर मुझसे कभी ना कहती है ,

तुम्हारे पास हूँ लेकिन जो दूरी है, समझता हूँ
तुम्हारे बिन मेरी हस्ती अधूरी है, समझता हूँ
तुम्हें मैं भूल जाऊँगा ये मुमकिन है नहीं लेकिन
तुम्हीं को भूलना सबसे जरूरी है, समझता हूँ

दिलों से दिलों का सफर आसान नहीं होता,
ठहरे हुए दरिया में तुफान नहीं होता,
मोहब्बत तो रूह में समा जाती है,
इसमें शब्दों का कोई काम नहीं होता,
मैं कवि हूं प्रेम का बांट रहा हूं प्रेम,
इससे बड़ा कोई काम नहीं होता”

vishwas shayari

बतायें क्या हमें किन-किन सहारों ने सताया है
नदी तो कुछ नहीं बोली, किनारों ने सताया है
सदा ही शूल मेरी राह से ख़ुद हट गए लेकिन
मुझे तो हर घडी हर पल बहारों ने सताया है 

तुझ को गुरुर ए हुस्न है मुझ को सुरूर ए फ़न
दोनों को खुदपसंदगी की लत बुरी भी है
तुझ में छुपा के खुद को मैं रख दूँ मग़र मुझे
कुछ रख के भूल जाने की आदत बुरी भी है

जब भी आना उतर के वादी में ,
ज़रा सा चाँद लेते आना तुम “

मिलते रहिए, कि मिलते रहने से
मिलते रहने का सिलसिला हूँ मैं.

dr kumar vishwas shayari

हर इक खोने में हर इक पाने में तेरी याद आती है
नमक आँखों में घुल जाने में तेरी याद आती है
तेरी अमृत भरी लहरों को क्या मालूम गंगा माँ
समंदर पार वीराने में तेरी याद आती है 

गम में हूँ य़ा हूँ शाद मुझे खुद पता नहीं
खुद को भी हूँ मैं याद मुझे खुद पता नहीं
मैं तुझको चाहता हूँ मगर माँगता नहीं
मौला मेरी मुराद मुझे खुद पता नहीं”

तुम अगर नहीं आयी गीत गा न पाउगा
सांस साथ छोड़ेगी, सुर सजा न पाउगा
तान भावना की है, शब्द शब्द दर्पण है
बांसुरी चली आओ, होठ का निमंत्रण है

रंग दुनियाने दिखाया है निराला, देखूँ
है अंधेरे में उजाला, तो उजाला देखूँ
आईना रख दे मेरे सामने, आखिर मैं भी
कैसा लगता हूँ तेरा चाहने वाला देखूँ !!

हमें मालूम है दो दिल जुदाई सह नहीं सकते
मगर रस्मे-वफ़ा ये है कि ये भी कह नहीं सकते
जरा कुछ देर तुम उन साहिलों कि चीख सुन भर लो
जो लहरों में तो डूबे हैं, मगर संग बह नहीं सकते

तुमने अपने होठों से जब छुई थीं ये पलकें !
नींद के नसीबों में ख्वा़ब लौट आया था !!
रंग ढूँढने निकले लोग जब कबीले के !
तितलियों ने मीलों तक रास्ता दिखाया था !!

Kumar Vishwas Ki Shayari Video

Kumar Vishwas ki shayari video form mein dekhna ek alag hi anubhav hai. Is blog mein, hum aapko unke shayari ke video clips ke madhyam se unka andaaz dikhayenge, jisse dekhkar aap unke lafzon ka jadoo mehsus kar sakenge.

Kumar Vishwas Ki Desh Bhakti Shayari

Kumar Vishwas ki desh bhakti shayari, unka prem desh aur rashtra ke prati dikhta hai. Unki kavitaon mein desh prem ka rang hai, jise padhkar aap bhi desh bhakti ka jazba mehsus karenge.

Kumar Vishwas Ki Desh Bhakti Shayari

ये वक्त बहुत ही नाजुक है,
हमारे ऊपर बहुत सारा हमले है …
दुश्मन का दर्द यही तो है ,
हम हर हमले पर संभले है … ।। 

जब सुख मैं नींद लेते हैं हम
तब हमारे जैसे कोई खरा हैं सीमाना पर
कभी मत भूलो उस वीर जवान को
जिन्होने हमारे लिए चोरा खुद का घर

लड़े हमारा संतान वीरों की तरह,
जब खून धारा की तरह निकल पड़ा
आखरी दम तक लड़ते रहे वो,
तब ही तो हमारा देश स्वाधीन हुआ

उनका हौसले का भुगतान क्या करेगा कोई ,
उनका शहादत का कर्ज स्वदेश पर उधार है ,
आप और हम इसलिए खुशहाल है किउकी ,
सीमा पर सैनिक शहादत को हैं तैयार

भारत प्यारा देश हमारा ,
सब देशों से अलग है …
हर जाइगा हर एक मौसम इसका ,
कैसा सुंदर नौशेरा है … ..

kumar vishwas ki desh bhakti shayari in hindi

राखियों की प्रतीक्षा , सिन्दूर दान की व्यथाऒं
देशहित प्रतिबद्ध यौवन कै सपन तुमको प्रणाम है
बहन के विश्वास भाई के मित्रता कुल के सहारे
पिता के व्रत के फलित माँ के नयन तुमको प्रणाम है 

रंग बदलता हर मौसम ,
बस यहीं सुहाना लगता है ,
मेरे मुल्क की मिट्टी के आगे ,
ये संसार पुराना लगता है

है प्रनाम उनको कि जो देह को अमरत्व देकर
इस दुनिया में शौर्य की जीवित रचना हो गये हैं
है प्रनाम उनको की जिनके सामने हिमालय वि छोटा हैं
जो धरती पर गिर पड़े लेकिन आसमानी हो गये हैं

पिता जिनके खून ने उज्जवल किया कुल वंश माथा
मां वही जो खुद से इस देश की रज तौल आई
बहन जीनोने सावन में मान लिया पतझर बसंत ही
भुजा ना उलझें कलाई से जो राखी खोल लाई

है प्रणाम उनको कि जिनको काल पाकर हुआ पावन
शिखर जिनके पैर छूकर और मानी हो गये हैं
कंचनी तन, चन्दनी मन, आँसू, प्यार, सपने
स्वदेश के हित कर चले सब कुछ हवन तुमको प्रणाम है

kumar vishwas ki deshbhakti shayari

हमने भेजे हैं सिकन्दर सर झुकाए मात खाऐ
हमसे टकराना हैं हैं वो जिनका मन धरा से भर गया है
नर्क में तुम पूछ लेना अपने बुजुर्गों से कभी भी
बाघ के दांतों से गिनती सीखने वालों वीर जवन के आगे 

आग का चिंगारी स्वाधीनता की सुलगी मेरे जश्न में है
क्रांति की ज्वालाएं लिपटी मेरे बदन में है …
देहांत जहा जन्नत हो ये बात मेरे वतन में है ,
आत्मबलिदान का जज्बा जिंदा मेरे कफ़न में है … ।।

कुछ पृष्ठ पढ़कर इतिहास के ,
मेरे देश के सीने में शमशिर हो गए…
जो लड़े युद्ध पे जो मेरे वो शहीद हो गए ,
जो डरे मैं झुके वजीर हो गए… ।।

सो गया अपनी भारत माता के लिए ,
मा मुझे अपने आंचल में तुम छुपा लो…
हाथ अपना रखलो मेरे बालों में ,
मेरा बचपन की लोरियां सुना दो… ।।

चलो फिर से हम वो स्मृति याद कर ले ,
शहीदों के दिल में थी वो दर्द याद कर ले…
जिस वजह से आजादी पहुंची थी किनारे
सैनिक का के खून की वो धारा याद कर ले… ।।

Kumar Vishwas Ki Shayari Hindi Mein

Kumar Vishwas ki shayari Hindi bhasha mein hi unka asli saundarya prakat karti hai. Aap yahan Hindi mein unki shayari padhkar unka anand utha sakte hain.

Kumar Vishwas Ki Shayari Hindi Mein

कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है,
मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है.
मैं तुझसे दूर कैसा हूँ, तू मुझसे दूर कैसी है,
ये तेरा दिल समझता है या मेरा दिल समझता है. 

मेरा जो भी तर्जुबा है, तुम्हे बतला रहा हूँ मैं
कोई लब छु गया था तब, की अब तक गा रहा हूँ मैं
बिछुड़ के तुम से अब कैसे, जिया जाये बिना तडपे
जो मैं खुद ही नहीं समझा, वही समझा रहा हु मैं

मेरे जीने मरने में, तुम्हारा नाम आएगा
मैं सांस रोक लू फिर भी, यही इलज़ाम आएगा
हर एक धड़कन में जब तुम हो, तो फिर अपराध क्या मेरा
अगर राधा पुकारेंगी, तो घनश्याम आएगा

मोहब्बत एक अहसासों की, पावन सी कहानी है,
कभी कबिरा दीवाना था, कभी मीरा दीवानी है,
यहाँ सब लोग कहते हैं, मेरी आंखों में आँसू हैं,
जो तू समझे तो मोती है, जो ना समझे तो पानी है।

अमावस की काली रातों में, जब दिल का दरवाजा खुलता है ,
जब दर्द की प्याली रातों में, गम आंसूं के संग होते हैं ,
जब पिछवाड़े के कमरे में , हम निपट अकेले होते हैं ,

kumar vishwas shayari in hindi

जब उंच-नीच समझाने में , माथे की नस दुःख जाती हैं,
तब एक पगली लड़की के बिन जीना गद्दारी लगता है,
और उस पगली लड़की के बिन मरना भी भरी लगता है!! 

भ्रमर कोई कुमुदनी पर मचल बैठा तो हंगामा
हमारे दिल में कोई ख्वाब पल बैठा तो हंगामा
अभी तक डूब कर सुनते थे सब किस्सा मोहब्बत का
मैं किस्से को हकीकत में बदल बैठा तो हंगामा

जब बासी फीकी धुप समेटें, दिन जल्दी ढल जाता है,
जब सूरज का लश्कर, छत से गलियों में देर से जाता है,

कोई खामोश है इतना, बहाने भूल आया हूँ
किसी की इक तरनुम में, तराने भूल आया हूँ
मेरी अब राह मत तकना कभी ए आसमां वालो
मैं इक चिड़िया की आँखों में, उड़ाने भूल आया हूँ

हमारे शेर सुनकर भी जो खामोश इतना है
खुदा जाने गुरुर ए हुस्न में मदहोश कितना है
किसी प्याले से पूछा है सुराही ने सबब मय का
जो खुद बेहोश हो वो क्या बताये होश कितना है

kumar vishwas shayari in hindi free download

ना पाने की खुशी है कुछ, ना खोने का ही कुछ गम है
ये दौलत और शोहरत सिर्फ, कुछ ज़ख्मों का मरहम है
अजब सी कशमकश है,रोज़ जीने, रोज़ मरने में
मुक्कमल ज़िन्दगी तो है, मगर पूरी से कुछ कम है

जब जल्दी घर जाने की इच्छा, मन ही मन घुट जाती है,
जब कॉलेज से घर लाने वाली, पहली बस छुट जाती है,

पनाहों में जो आया हो, उस पर वार क्या करना
जो दिल हारा हुआ हो, उस पे फिर से अधिकार क्या करना
मोहब्बत का मज़ा तो, डूबने की कशमकश में है
जो हो मालूम गहरायी, तो दरिया पार क्या करना

वो जिसका तीर चुपके से जिगर के पार होता है
वो कोई गैर क्या अपना ही रिश्तेदार होता है
किसी से अपने दिल की बात तू कहना ना भूले से
यहाँ ख़त भी थोड़ी देर में अखबार होता है

जब बेमन से खाना खाने पर, माँ गुस्सा हो जाती है,
जब लाख मन करने पर भी, पारो पढने आ जाती है

dard kumar vishwas shayari

तुम्हीं पे मरता है ये दिल अदावत क्यों नहीं करता,
कई जन्मों से बंदी है बगावत क्यों नहीं करता,
कभी तुमसे थी जो वो ही शिकायत है ज़माने से,
मेरी तारीफ़ करता है मोहब्बत क्यों नहीं करता। 

मैं उसका हूँ वो इस एहसास से इनकार करती है
भरी महफ़िल में भी, रुसवा हर बार करती है
यकीं है सारी दुनिया को, खफा है हमसे वो लेकिन
मुझे मालूम है फिर भी मुझी से प्यार करता है

जब कमरे में सन्नाटे की आवाज सुनाई देती है ,
जब दर्पण में आँखों के नीचे झाई दिखाई देती है ,

जब बड़की भाभी कहती हैं , कुछ सेहत का भी ध्यान करो ,
क्या लिखते हो दिनभर , कुछ सपनों का भी सम्मान करो ,

जब बाबा वाली बैठक में कुछ रिश्ते वाले आते हैं ,
जब बाबा हमें बुलाते हैं , हम जाते हैं , घबराते हैं ,

Kumar Vishwas Ki Love Shayari

Kumar Vishwas ki love shayari, pyaar bhare lafzon ka safar hai. Unki shayari mein prem, ishq, aur mohabbat ke rang hain, jo aapke dilon ko chhu sakte hain.

Kumar Vishwas Ki Love Shayari

Teri aankhon mein, chhupi raaz hai jindagi ka,
Tere bina, har lamha suna sa lagta hai. 

Tere ishq mein, har pal ek kahani hai,
Teri yaadon mein, khushiyon ka jahan hai.

Teri yaadon mein, khoye rehna chahta hoon,
Tere saath, zindagi ke har lamhe ko jeena chahta hoon.

Tere pyaar mein, har lafz ek kavita hai,
Tere bina, zindagi mein kuch bhi adhoora hai.

Tere ishq mein, duniya ki har kushi hai,
Teri yaadon se, dil ko sukoon milta hai.

vishwas shayari 2 line

Tere pyaar mein, zindagi ke rang hai,
Teri yaadon se, dil ko sukoon milta hai. 

Teri aankhon mein, chhupi raaz hai jindagi ka,
Tere bina, har lamha suna sa lagta hai.

Tere ishq mein, har pal ek kahani hai,
Teri yaadon mein, khushiyon ka jahan hai.

Teri yaadon mein, khoye rehna chahta hoon,
Tere saath, zindagi ke har lamhe ko jeena chahta hoon.

Tere pyaar mein, har lafz ek kavita hai,
Tere bina, zindagi mein kuch bhi adhoora hai.

kumar vishwas love shayari

Tere ishq mein, duniya ki har kushi hai,
Teri yaadon se, dil ko sukoon milta hai. 

Tere saath, har lamha hai ek sapna,
Teri yaadon se, dil mein basa hua hai jahan.

Tere pyaar mein, duniya ek mehfil hai,
Tere bina, zindagi ek khali si kahani hai.

Teri ishq mein, har pal ek kavita hai,
Teri yaadon se, dil ko sukhad milta hai.

Teri aankhen, meri duniya ka aaina hai,
Tere bina, sab kuch adhoora sa lagta hai.

kumar vishwas love shayari in hindi

Tere ishq mein, zindagi ek nayi kahani hai,
Teri yaadon se, har din ek taaza jahan hai. 

Teri yaadon mein, kho jana ek khushi hai,
Tere saath, har lamha ek meetha sa safar hai.

Tere pyaar mein, dil ki har baat hai,
Tere saath, zindagi ek hasin raaz hai.

Teri ishq mein, duniya ki har khushi hai,
Teri yaadon se, dil ko sukhon milta hai.

Teri aankhon mein, chhupi hai zindagi ki raaz,
Tere bina, duniya suni sa lagta hai.

Tere pyaar mein, har lafz ek kavita hai,
Tere bina, zindagi mein kuch bhi adhoora hai.

Best Kumar Vishwas Ki Shayari

Is blog mein, hum aapko Kumar Vishwas ki shayari ke behtareen sher aur kavitao se rubaru karayenge. Unki shayari ka asli johar aapko yahan mil sakta hai.

Best Kumar Vishwas Ki Shayari

ना #पाने की खुशी है कुछ,ना “खोने” का ही कुछ गम है,
ये ‘दौलत’ और #शौहरत सिर्फ कुछ #जख्मों का मरहम है !
अजब सी #कशमकश है रोज जीने ,रोज मरने में,
मुक्कमल जिंदगी तो है, मगर #पूरी से कुछ कम है !! 

अपनी “दुनिया” अपनी धुन मे खो #जाऊ तो क्या होगा ?
जैसी तुम हो मै भी #वैसा हो जाऊ तो क्या होगा…?

हर “मजहब” से सीखा हमने ,
पहले #देश का नारा …
मत बांटो इसे #एकही रहने दो ,
प्यारा_हिंदुस्तान_हमारा … ।। 😊☺️

उसी की #तरह मुझे सारा ‘ज़माना’ चाहे,
वो मेरा होने से #ज्यादा मुझे पाना चाहे,
मेरी_पलकों से फिसल जाता है चेहरा तेरा,
ये मुसाफिर हो कोई #ठिकाना चाहे।

#सियासत में तेरा खोया या #पाया हो नहीं सकता,
तेरी “शर्तों” पे गायब या “नुमाया” हो नहीं सकता ,
भले साजिश से गहरे #दफ्न मुझको कर भी दो पर मैं ,
“सृजन” का बीज हूं मिट्टी में जाया हो नहीं सकता..!

vishwas ki shayari

तुम्ही पे #मरता है ये दिल #अदावत क्यों नहीं करता
कई #जन्मो से बंदी है “बगावत” क्यों नहीं करता..
कभी_तुमसे थी जो वो ही शिकायत हे ज़माने से
मेरी तारीफ़ करता है #मोहब्बत क्यों नहीं करता.. 

#स्वंय से दूर हो तुम भी ‘स्वंय’ से दूर है हम भी
बहुत “मशहूर” हो तुम भी बहुत #मशहूर है हम भी
बड़े मगरूर हो #तुम भी बड़े मगरूर है हम भी
अतः मजबूर हो तुम भी अतः #मजबूर है हम भी।

मेरे जीने_मरने में, तुम्हारा नाम आएगा.
मैं सांस #रोक लू फिर भी, यही #इलज़ाम आएगा.
हर एक #धड़कन में जब तुम हो, तो फिर “अपराध” क्या मेरा,
अगर #राधा पुकारेंगी, तो “घनश्याम” आएगा.

कहीं पर #जग लिए तुम बिन, कहीं पर सो_लिए तुम बिन
भरी “महफिल” में भी अक्सर, #अकेले हो लिए तुम बिन
ये पिछले “चंद” वर्षों की कमाई साथ है अपने
कभी तो हंस लिए तुम बिन, कभी तो रो_लिए तुम बिन

#गिरेबान चेक करना क्या है #सीना और मुश्किल है,
हर एक पल “मुस्कुराकर” अश्क पीना और मुश्किल है,
हमारी #बदनसीबी ने हमें बस इतना सिखाया है,
किसी के #इश्क़ में मरने से “जीना” और मुश्किल है.

biswas shayari in hindi

ना पाने की #खुशी है कुछ ,ना #खोने का ही कुछ गम है…
ये “दौलत” और शौहरत सिर्फ कुछ “जख्मों” का मरहम है…
अजब सी #कशमकश है रोज जीने ,रोज मरने में…
“मुक्कमल” जिंदगी तो है, मगर #पूरी से कुछ कम है…” 

गाँव_गाँव ‘गाता’ फिरता हूँ, खुद में #मगर बिन गाय हूँ,
तुमने #बाँध लिया होता तो खुद में “सिमट” गया होता मैं,
तुमने छोड़ दिया है तो #कितनी दूर निकल आया हूँ मैं…!!
कट न पायी किसी से “चाल” मेरी, लोग देने लगे मिसाल मेरी…!
मेरे “जुम्लूं” से काम लेते हैं वो, बंद है जिनसे #बोलचाल मेरी…!!

हमारे “शेर” सुनकर भी जो #खामोश इतना है,
#खुदा जाने गुरुर ए हुस्न में #मदहोश कितना है.
किसी “प्याले” से पूछा है सुराही ने #सबब मय का,
जो खुद “बेहोश” हो वो क्या बताये होश कितना है.

#क़लम को खून में खुद के “डुबोता” हूँ तो हंगामा,
गिरेबां अपना #आँसू में भिगोता हूँ तो हंगामा,
नहीं मुझ पर भी जो खुद की #ख़बर वो है ज़माने पर,
मैं #हँसता हूँ तो हंगामा, मैं “रोता” हूँ तो हंगामा…!!

हिम्मत-ए-रौशनी बढ़ जाती है,
हम “चिरागों” की इन हवाओं से,
कोई तो जा के #बता दे उस को,
चैन #बढता है बद्दुवाओं से.

kumar vishwas kavita lyrics

सब अपने “दिल” के राजा है, सबकी #कोई रानी है,
भले “प्रकाशित” हो न हो पर सबकी_कोई कहानी है.
बहुत #सरल है किसने कितना दर्द सहा,
जिसकी जितनी #आँख हँसे है, उतनी #पीर पुरानी है. 

अगर “दिल” ही मुअज्जन हो #सदायें काम आती हैं,
समन्दर में सभी #माफिक हवायें काम आती हैं
मुझे आराम है ये #दोस्तों की मेहरवानी है,
#दुआयें साथ हों तो सब “दवायें” काम आतीं है।

हमारे #शेर सुन कर भी जो “खामोश” इतना है
खुदा जाने गुरूर-ए-हुस्न में #मदहोश कितना है
किसी “प्याले” से पुछा है सुराही मैं सबब में का
जो खुद बेहोश हो वो_क्या बताये के होश कितना है

जो “धरती” से अम्बर जोड़े, उसका नाम #मोहब्बत है,
जो शीशे से “पत्थर” तोड़े, उसका नाम #मोहब्बत है,
कतरा कतरा #सागर तक तो,जाती है हर #उमर मगर,
बहता ‘दरिया’ वापस मोड़े, उसका नाम #मोहब्बत है

सदा तो #धूप के हाथों में ही परचम नहीं होता
खुशी के घर में भी #बोलों कभी क्या गम नहीं होता
फ़क़त इक आदमी के “वास्तें” जग छोड़ने वालो
फ़क़त उस #आदमी से ये ज़माना_कम नहीं होता।

Dr. Vishwas Kumar Ki Shayari

Dr. Kumar Vishwas ki shayari, unke vidyadhar aur sahityik drishtikon ko prakat karti hai. Unke shabdon mein gyan aur sahitya ka amrit basa hai.

Dr. Vishwas Kumar Ki Shayari

Teri yaadon mein, kho jana chahta hoon,
Tere saath, har pal apna banana chahta hoon. 

Tere ishq mein, rangon ka jahan hai,
Tere bina, duniya adhoori lagti hai.

Teri aankhon mein, khoye rehna chahta hoon,
Tere saath, har pal apna jeena chahta hoon.

Tere pyaar mein, har lamha ek khwab hai,
Tere saath, zindagi ko pyara bana chahta hoon.

Tere ishq mein, har raat ek kavita hai,
Teri yaadon se, dil ko sukhad milta hai.

shayari vishwas

Teri muskurahat, meri subahon ka taara hai,
Tere bina, zindagi mein andhera hai. 

Tere pyaar mein, har baat ek afsana hai,
Teri yaadon se, dil ka dard kam ho jata hai.

Tere ishq mein, har pal ek ehsaas hai,
Teri yaadon se, dil ko sukoon milta hai.

Teri yaadon ka jadoo, dil se juda nahi hota,
Tere saath, zindagi ek khwab si hoti hai.

Tere pyaar mein, har din nayi umeed hai,
Teri yaadon se, zindagi ek kahani hai.

dr kumar vishwas kavita

Tere ishq mein, har baat ek gazal hai,
Teri yaadon se, dil ko chain milta hai. 

Teri aankhon mein, chhupi hai zindagi ki raaz,
Tere bina, duniya adhoori sa lagta hai.

Tere pyaar mein, zindagi ki rangat hai,
Teri yaadon se, har lamha hai pyaara.

Teri yaadon mein, kho jana ek sukh hai,
Tere saath, zindagi ek khushi ka safar hai.

Tere ishq mein, duniya ek kahani hai,
Teri yaadon se, dil ko sukoon milta hai.

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Teri yaadon ka jadoo, dil se nahi jaata,
Tere saath, har din naya safar banata hai. 

Tere pyaar mein, mohabbat ki lehar hai,
Teri yaadon se, dil ko sukoon milta hai.

Teri yaadon ka safar, mere dil ka hissa hai,
Tere bina, zindagi adhoori lagti hai.

Tere ishq mein, har pal ek kavita hai,
Teri yaadon se, dil ko sukhad milta hai.

Teri muskurahat, meri duniya ki roushni hai,
Tere bina, andhera sa lagta hai.

Ishq Ki Shayari Kumar Vishwas

Kumar Vishwas ki shayari mein ishq ke lafz aise hote hain jinse aapka dil dhadakne lage. Unka ishq, unki shayari mein jhalakta hai, aur aapke dil ko chhoo jata hai.

Ishq Ki Shayari Kumar Vishwas

वो जो खुद में से कम निकलतें हैं
उनके ज़हनों में बम निकलतें हैं
आप में कौन-कौन रहता है
हम में तो सिर्फ हम निकलते हैं। 

चंद चेहरे लगेंगे अपने से ,
खुद को पर बेक़रार मत करना ,
आख़िरश दिल्लगी लगी दिल पर?
हम न कहते थे प्यार मत करना…!!

उम्मीदों का फटा पैरहन,
रोज़-रोज़ सिलना पड़ता है,
तुम से मिलने की कोशिश में,
किस-किस से मिलना पड़ता है

कलम को खून में खुद के डुबोता हूँ तो हंगामा
गिरेबां अपना आंसू में भिगोता हूँ तो हंगामा
नही मुझ पर भी जो खुद की खबर वो है जमाने पर
मैं हंसता हूँ तो हंगामा, मैं रोता हूँ तो हंगामा.

कितनी दुनिया है मुझे ज़िन्दगी देने वाली
और एक ख्वाब है तेरा की जो मर जाता है
खुद को तरतीब से जोड़ूँ तो कहा से जोड़ूँ
मेरी मिट्टी में जो तू है की बिखर जाता है

love vishwas shayari

हमें बेहोश कर साकी , पिला भी कुछ नहीं हमको
कर्म भी कुछ नहीं हमको , सिला भी कुछ नहीं हमको
मोहब्बत ने दे दिआ है सब , मोहब्बत ने ले लिया है सब
मिला कुछ भी नहीं हमको , गिला भी कुछ नहीं हमको !! 

आँखें की छत पे टहलते रहे काले साये,
कोई पहले में उजाले भरने नहीं आया…!
कितनी दिवाली गयी, कितने दशहरे बीते,
इन मुंडेरों पर कोई दीप न धरने आया…!!

जब आता है जीवन में खयालातों का हंगामा
हास्य बातो या जज़्बातो मुलाकातों का हंगामा
जवानी के क़यामत दौर में ये सोचते है सब
ये हंगामे की राते है या है रातो का हंगामा

हर एक नदिया के होंठों पे समंदर का तराना है,
यहाँ फरहाद के आगे सदा कोई बहाना है !
वही बातें पुरानी थीं, वही किस्सा पुराना है,
तुम्हारे और मेरे बिच में फिर से जमाना है…!!

मेहफिल-महफ़िल मुस्काना तो पड़ता है,
खुद ही खुद को समझाना तो पड़ता है
उनकी आँखों से होकर दिल जाना.
रस्ते में ये मैखाना तो पड़ता है..

dr kumar vishwas poetry in hindi lyrics

हम को हरगिज़ नहीं ख़ुदा मंज़ूर
या’नी हम बे-तरह ख़ुदा के हैं 

हम को यारों ने याद भी न रखा
‘जौन’ यारों के यार थे हम तो

हमारे ज़ख़्म-ए-तमन्ना पुराने हो गए हैं
कि उस गली में गए अब ज़माने हो गए हैं

हम ने क्यूँ ख़ुद पे ए’तिबार किया
सख़्त बे-ए’तिबार थे हम तो

हमला है चार सू दर-ओ-दीवार-ए-शहर का
सब जंगलों को शहर के अंदर समेट लो

kumar vishwas prem shayari

सोचता हूँ कि उस की याद आख़िर
अब किसे रात भर जगाती है 

याद उसे इंतिहाई करते हैं
सो हम उस की बुराई करते हैं

कोई “दीवाना” कहता है, कोई ‘पागल’ समझता है,
मगर #धरती की बेचैनी को बस #बादल समझता है.
मैं ‘तुझसे’ दूर कैसा हूँ, तू मुझसे दूर कैसी है,
ये तेरा दिल समझता है या मेरा “दिल” समझता है।

लड़े वो #वीर जवानों की तरह ,
ठंडा खून “फौलाद” हुआ …
मरते मरते भी कई मार गिराए ,
तभी तो देश “आजाद” हुआ … ।। 🙂

एक दो_दिन मे वो इकरार कहाँ आएगा,
हर सुबह एक ही #अखबार कहाँ आएगा ,
आज जो “बांधा” है इन में तो बहल जायेंगे,
रोज_इन बाहों का #त्योहार कहाँ आएगा…!!

 

Is blog post mein hamne Kumar Vishwas ki shayari ko ek naye nazariye se dekha. Unke shabdon mein chhupi gehraiyon ko samjha aur unke anmol alfaz ko aapke saath saanjha kiya. Shayari ka yeh rangin safar kabhi khatam nahi hota, aur Kumar Vishwas ji ne iss safar ko hamesha naye rangon se bhar diya. Hum ummid karte hain ki aapko yeh shayariyon ka safar pasand aaya hoga, aur aap bhi inke fan ban gaye honge. Agar aapke paas bhi koi pasandida Kumar Vishwas ki shayari ho, toh humse share karein. Shukriya aur milte hain agli blog post mein!

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